दयानंद महिला कालेज में शिक्षा के साथ भारतीय संस्कार भी सिखाए जाते है: मंत्री कर्णदेव कांबोज

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दयानंद महिला कालेज में दीक्षांत एवं पारितोषिक वितरण समारोह का आयोजन किया गया जिसमें खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री कर्णदेव कांबोज ने बतौर मुख्यअतिथि पहुंचकर छात्राओं को पुरस्कार और डिग्रियां वितरित की। समारोह की अध्यक्षता थानेसर के विधायक सुभाष सुधा ने की। कालेज प्रबंधक समिति और कालेज स्टाफ ने मुख्यअतिथि के पहुंचने पर पुष्प गुच्छ देकर जोरदार स्वागत किया। मुख्यअतिथि कर्णदेव कांबोज ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित करके किया। उन्होंने डिग्रियां प्राप्त करने वाली छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना की और शुभकामनाएं दी। उन्होंने अपने स्वैच्छिक कोष से कालेज छात्राओं के कल्याण के लिए पांच लाख रूपये की ग्रांट देने की घोषणा की। 
मंत्री कर्णदेव कांबोज ने कालेज की छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि दयानंद महिला विद्यालय में छात्राओं को केवल शिक्षा ही नही बल्कि भारतीय संस्कार भी सिखाए जाते है। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राएं जिस भी क्षेत्र में जाएंगी वें वहां पर अच्छा काम कर अपने संस्थान का नाम रोशन करेंगी। उन्होंने छात्राओं को पूरी लग्र, मेहनत और ईमानदारी से काम करने की नसीहत दी ताकि जीवन में सफलता की उंचाईयों को छुआ जा सके। उन्होंने छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाओं में लड़कों के मुकाबले लड़कियां बाजी मार रही है। प्राचीन समय में महिलाओं को अबला नारी कहा जाता था, परंतु भारत देश की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नही है। आजकल हमारी बेटियां आईएएस, आईपीएस अफसर बनकर सरकार के प्रशासनिक कार्य संभाली रही है तथा जज, पायलट तथा पर्वतारोही बनकर देश का नाम रोशन कर रही है। सरकार ने भी बेटियों को बचाने के लिए कड़ा कदम उठाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत की धरती से बेटी बचाने और बेटी पढ़ाने का संदेश दिया जिसका परिणाम हुआ कि हरियाणा में बेटियों की संख्या 837 से बढ़कर 950 के करीब पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि शिक्षित बेटी अपने मायके और सुसराल दोनों घरों में शिक्षा का उजियारा फैलाती है। महर्षि दयानंद ने भी 1875 में आर्य समाज की स्थापना के समय नारी शिक्षा पर जोर दिया था। 
मंत्री कांबोज ने छात्राओं को बताया कि भारतीय शिक्षा पद्धति का गौरवमयी इतिहास रहा है। उत्तम शिक्षा पद्धति, संस्कार और संस्कृति के बल पर भारत को विश्व गुरू माना जाता था। जिसके कारण भारत के तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों में दूसरे देशों से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे, लेकिन 1835 में लार्ड मैकाले ने वैद्धिक संस्कृति के विरूध षडयंत्र रचकर भारतीय शिक्षा पद्धति को खंडित कर छात्रों को सिर्फ क्लर्क बनने की सोच तक सीमित कर दिया और भारतीय शिक्षा पर पाश्चत्य संस्कृति का रंग चढऩे लगा जिससे काफी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि अब समय बदलने लगा है और डीएवी संस्थाओं में भारतीय शिक्षा, संस्कृति से ओतप्रोत शिक्षा दी जाती है। दयानंद महिला महाविद्यालय में छात्राओं की संख्या करीब 2250 है जो महर्षि दयांनद की शिक्षाओं पर चलकर अपने घर व कालेज में दैनिक यज्ञ करती है। जिससे वातावरण शुद्ध होता है और बीमारियां दूर होती है। 
थानेसर से विधायक सुभाष सुधा ने भी कहा कि इस कालेज की स्थापना को 36 वर्ष हो चुके है और वह शुरू से ही इस कालेज में आते रहे है। उन्हे खुशी है इस कालेज में पढाई के साथ-साथ संस्कार भी दिए जाते है। उन्होंने मुख्यअतिथि कर्णदेव कांबोज के बारे में बताया कि वह आर्य समाजी परिवार में पैदा हुए है, वह भारतीय संस्कृति, संस्कार को भलि प्रकार से जानते है। उन्होंने बताया कि कुरूक्षेत्र में एक राजकीय महिला महाविद्यालय बनाया जा रहा है। समारोह के दौरान पुरस्कार और डिग्रियां प्राप्त करने वाली छात्राओं में विशेष उत्साह नजर आ रहा था। इस अवसर पर हिमाचल के महामहिम राज्यपाल के  ओएसडी डा. राजेंद्र विद्यालंकार, डा. सुखदेव चौधरी, प्रिंसीपल अनिता गुप्ता, दीनानाथ अरोडा ने भी अपने विचार रखे।